नई दिल्लीः ममता बनर्जी को गुरुवार को एक और झटका उस समय लगा, जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने उच्च सदन से इस्तीफ़ा दे दिया। सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के बाद यह तीसरे सांसद का इस्तीफा है। बराइक के इस्तीफ़े के साथ राज्यसभा में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर 10 सांसद रह जाएगी। सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि अगले हफ़्ते के अंदर TMC के तीन और राज्यसभा सांसद इस्तीफ़ा दे सकते हैं, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए संकट और गहरा सकता है।
प्रकाश चिक बड़ाइक ने कहा, "पश्चिम बंगाल के लोगों की राय को मानते हुए, मैंने भी आज अपना इस्तीफा दे दिया है।" जब उनसे पूछा गया कि क्या वह BJP में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा, "यह तो समय ही बताएगा।"
कई विधायक पहले ही कर चुके हैं बगावत
ये घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में टीएमसी के विधायक दल के भीतर बगावत के बीच सामने आए हैं। खबरों के अनुसार, पार्टी के 58 विधायकों ने नेतृत्व की बात न मानते हुए नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए ऋतब्रता बनर्जी का समर्थन किया और पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय को खारिज कर दिया।
इस्तीफे में लिखी ये बातें
राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को लिखे पत्र में प्रकाश चिक बराइक ने कहा, 'मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देता हूं, जिसे कृपया तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए। राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मिली सभी मदद और सहयोग के लिए मैं आपके, उप-सभापति और राज्यसभा सचिवालय के सभी अधिकारियों के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ'।

कौन है प्रकाश चिक बराइक
प्रकाश चिक बराइक (Prakash Chik Baraik) पश्चिम बंगाल के एक प्रमुख आदिवासी नेता और राजनीतिज्ञ हैं। वे पश्चिम बंगाल के सिल्लीगुडी इलाके से आते हैं। उन्होंने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया है। बड़ाईक पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले से आते हैं। टीएमसी के टिकट पर अगस्त 2023 में पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए थे। पश्चिम बंगाल से राज्यसभा पहुंचने वाले अपने समुदाय के पहले आदिवासी नेताओं में से एक थे।
उन्हें टीएमसी ने अलीपुरद्वार जिले का अध्यक्ष भी नियुक्त किया था। उन्होंने संसद में उन्होंने हमेशा चाय बागान के गरीब मजदूरों के अधिकारों, उनके भविष्य निधि (PF), और सामाजिक कल्याण योजनाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव के बाद एक ही हफ्ते के भीतर इस्तीफा देने वाले वे तीसरे राज्यसभा सांसद हैं।
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